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बच्चों के लिए खाटू श्याम जी की कहानी — बर्बरीक की सरल कथा

अंतिम अपडेट: 4 अक्टूबर 2026

यह कहानी बच्चों को सुनाने के लिए सरल शब्दों में लिखी है। बड़े पूरी कथा यहाँ पढ़ सकते हैं।

बहादुर बर्बरीक

बहुत समय पहले एक बहादुर बालक था — बर्बरीक। उसके पिता घटोत्कच और दादा बलशाली भीम थे। उसकी माँ ने उसे सिखाया था: "बेटा, हमेशा उसका साथ देना जो कमज़ोर हो या हार रहा हो।"

तीन जादुई बाण

बर्बरीक की भक्ति से खुश होकर देवी ने उसे तीन ख़ास बाण दिए। इन्हीं की वजह से उसे "तीन बाणधारी" कहा जाने लगा। वह अपने नीले घोड़े पर सवार होकर निकल पड़ा।

कृष्ण की परीक्षा

रास्ते में एक ब्राह्मण मिले — असल में वे श्रीकृष्ण थे। उन्होंने बर्बरीक से पीपल के सारे पत्तों को एक बाण से भेदने को कहा। बाण ने सारे पत्ते छेद दिए, पर एक पत्ता श्रीकृष्ण ने अपने पैर के नीचे छिपा लिया था — बाण उनके पैर के चारों ओर घूमने लगा। बर्बरीक की शक्ति देखकर कृष्ण मुस्कुराए।

सबसे बड़ा दान

कृष्ण ने कहा, "मुझे दान चाहिए।" बर्बरीक ने कहा, "जो माँगिए, दूँगा।" कृष्ण ने उसका शीश माँग लिया। बर्बरीक ज़रा भी नहीं घबराया और हँसते हुए अपना शीश दान कर दिया। इसीलिए उन्हें "शीश के दानी" कहा जाता है।

श्याम नाम का आशीर्वाद

कृष्ण बहुत प्रसन्न हुए और बोले, "तुम कलियुग में मेरे नाम श्याम से पूजे जाओगे, और जो भी हारा या दुखी तुम्हारे पास आएगा, तुम उसका सहारा बनोगे।" इसीलिए आज भी लोग उन्हें "हारे का सहारा" कहते हैं।

कहानी से सीख

यह कथा परम्परा और लोक-कथाओं से है; अलग क्षेत्रों में इसके रूप थोड़े अलग मिलते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल