एकादशी व्रत कैसे रखें — नियम, खान-पान और पारण समय
अंतिम अपडेट: 4 अक्टूबर 2026
एकादशी चन्द्र मास की ग्यारहवीं तिथि है। श्याम बाबा के भक्तों के लिए यह दिन विशेष है — इस दिन भजन, जागरण और दर्शन की परम्परा है। नीचे व्रत की सरल जानकारी है।
व्रत श्रद्धा का विषय है, कठोरता का नहीं। बच्चे, बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ, बीमार या नियमित दवा लेने वाले लोग निर्जल व्रत न करें; फलाहार/एक समय भोजन या केवल पूजा-भजन से भी व्रत का भाव निभाया जा सकता है। स्वास्थ्य की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लें।
व्रत का क्रम
- दशमी (एक दिन पहले): शाम को हल्का, सात्त्विक भोजन करें; चावल, प्याज़-लहसुन से परहेज़ करें।
- एकादशी: सुबह स्नान कर संकल्प लें, बाबा श्याम/भगवान विष्णु की पूजा करें, दिन भर भजन-स्मरण करें।
- द्वादशी (अगले दिन): सूर्योदय के बाद, पारण-समय में व्रत खोलें और ज़रूरतमंद को भोजन/दान दें।
व्रत में क्या खाएँ, क्या नहीं
खा सकते हैं
फल, दूध-दही, मखाना, मेवे, आलू/शकरकंद, सेंधा नमक, छाछ, नारियल पानी (फलाहार वाले व्रत में)।
न खाएँ
चावल और अनाज, दालें, प्याज़-लहसुन, साधारण नमक, माँस-मदिरा, तंबाकू।
पारण — व्रत खोलने के नियम
- पारण द्वादशी तिथि में और सूर्योदय के बाद ही करें।
- हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) में पारण नहीं किया जाता; उसके समाप्त होने के बाद करें।
- सुबह (प्रातःकाल) पारण श्रेष्ठ माना जाता है; किसी कारण से संभव न हो तो मध्याह्न के बाद द्वादशी समाप्त होने से पहले।
हर एकादशी का गणित से निकला पारण-समय एकादशी कैलेंडर में दिया है (खाटू के सूर्योदय के अनुसार)। अंतिम निर्णय के लिए अपने पंचांग/पंडित से पुष्टि करें।
खाटू श्याम जी में एकादशी
हर एकादशी–द्वादशी पर खाटू में विशेष भीड़ रहती है, और मंदिर के खुलने का समय बढ़ सकता है। फाल्गुन शुक्ल एकादशी पर लक्खी मेला और कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी) पर उत्सव मनाया जाता है। यात्रा से पहले कैसे पहुँचें और यात्रा गाइड देखें।